(N/A) जैसे ही रक्त ऊतकों में केशिकाओं से गुजरता है,कुछ पानी और छोटे जल-घुलनशील पदार्थ ऊतकों की कोशिकाओं के बीच के स्थानों में बाहर निकल जाते हैं,जिससे बड़े प्रोटीन और अधिकांश संगठित पदार्थ रक्त वाहिकाओं में ही रह जाते हैं। बाहर निकले इस तरल को अंतरालीय तरल या ऊतक तरल कहा जाता है।
इसमें प्लाज्मा के समान ही खनिज वितरण होता है।
रक्त और कोशिकाओं के बीच पोषक तत्वों,गैसों आदि का आदान-प्रदान हमेशा इसी तरल के माध्यम से होता है।
लसिका तंत्र नामक वाहिकाओं का एक विस्तृत नेटवर्क इस तरल को इकट्ठा करता है और इसे वापस मुख्य शिराओं में डाल देता है। लसिका तंत्र में मौजूद तरल को लसिका कहा जाता है।
लसिका का संगठन: लसिका एक रंगहीन तरल है। इसका संगठन रक्त प्लाज्मा के समान होता है,लेकिन इसमें घुले हुए लवणों की सांद्रता अलग होती है।
लसिका में रक्त प्लाज्मा की तुलना में कम प्रोटीन तत्व और फाइब्रिनोजेन तत्व होते हैं,लेकिन इसमें ऊतक चयापचय से प्राप्त अपशिष्ट तत्व होते हैं।
छोटी केशिकाओं में लसिका में कोई कोशिका नहीं होती है। लेकिन जब लसिका लसिका ग्रंथियों से गुजरती है,तो छोटे लिम्फोसाइट्स $(99 \%)$ और शेष $1 \%$ में RBCs और इओसिनोफिल्स देखे जाते हैं।
कार्य: लसिका में लिम्फोसाइट्स होते हैं जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं। यह पोषक तत्वों,हार्मोन आदि के लिए एक महत्वपूर्ण वाहक है।
आंतों के विली में मौजूद लैक्टियल्स के माध्यम से वसा का अवशोषण लसिका द्वारा होता है।